उत्तराखंड

80 से ज्यादा शिकायतों के बाद दर्ज हुई FIR, खरगे की सभा से राहुल गांधी की प्रेसवार्ता तक ऐसे बढ़ता गया ‘शुद्धीकरण’ विवाद

हल्द्वानी: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी में हुई सभा के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धीकरण को लेकर उत्तराखंड में सियासी विवाद लगातार बढ़ता गया। विरोध और दबाव के बीच 80 से ज्यादा शिकायतें अलग-अलग थानों में पहुंचीं, जिसके बाद आखिरकार हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने महिला अधिवक्ता अंजू की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। कांग्रेस और दलित समाज के प्रतिनिधियों ने प्रदेशभर में प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की थी। एसपी सिटी मनोज कत्याल के मुताबिक, शिकायतों की संख्या काफी अधिक है और एक व्यक्ति की ओर से एक साथ कई अधिकारियों को ईमेल के जरिए भी शिकायतें भेजी गई हैं।

वायरल फोटो-वीडियो बन सकते हैं अहम सबूत

रामलीला मैदान में हुए शुद्धीकरण अनुष्ठान के दौरान बनाए गए फोटो और वीडियो अब जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जा रहे हैं। श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा समिति न्यास की ओर से आयोजित अनुष्ठान के दौरान हवन करते लोगों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए थे।

वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर पंत के मुताबिक, पुलिस की शुरुआती जांच केवल हवन तक सीमित नहीं रह सकती। राजनीतिक रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के दौरान विभिन्न नेताओं की ओर से दिए गए बयानों और टिप्पणियों को भी जांच के दायरे में लिया जा सकता है। नए जांच अधिकारी अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेंगे और अनुष्ठान में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों से पूछताछ भी की जा सकती है।

पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और डिजिटल फुटेज के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय कर रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि हवन के दौरान किन मंत्रों का उच्चारण किया गया था और वे शुद्धीकरण से जुड़े मंत्र थे या सामान्य हवन में बोले जाने वाले मंत्र।

पुलिस भवन की बढ़ाई गई सुरक्षा

मुकदमा दर्ज होने में देरी को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लगातार विरोध प्रदर्शन से पुलिस विभाग की चिंता भी बढ़ी है। आक्रोशित कार्यकर्ता कई बार पुलिस भवन की ओर कूच कर चुके हैं। इसे देखते हुए हल्द्वानी पुलिस बहुद्देशीय भवन की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

पुलिस भवन में 20 पुलिसकर्मियों की 24 घंटे तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत भवन के दोनों गेट भी बंद कर दिए गए हैं।

28 दिन में 25 प्रदर्शन के बाद कानूनी कार्रवाई

रामलीला मैदान के कथित शुद्धीकरण को लेकर विवाद शुरू होने के बाद 28 दिनों तक राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध प्रदर्शन होते रहे। इस दौरान करीब 25 प्रदर्शन हुए। 11 अगस्त को कांग्रेस ने पहली बार इस अनुष्ठान पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे दलित विरोधी कृत्य बताया था।

इसके बाद देहरादून से हल्द्वानी तक कांग्रेस, युवा कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए। राज्य के लगभग सभी जिलों में धरना, प्रदर्शन और थानों के घेराव का दौर चला। प्रदर्शन के दौरान नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर लगातार बयान भी दिए गए।

राहुल गांधी की प्रेसवार्ता के बाद राष्ट्रीय स्तर पर गरमाया मुद्दा

अगस्त के मध्य में कुछ समय के लिए विरोध की तीव्रता कम हुई, लेकिन 29 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दिल्ली में हुई प्रेसवार्ता के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया। राहुल गांधी ने विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुद्धीकरण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद उत्तराखंड से लेकर कर्नाटक तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई।

चार सितंबर को बेंगलुरु में इस प्रकरण से जुड़ी एफआईआर दर्ज की गई। इसमें कई नेताओं को आरोपी बनाया गया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

13 जिलों तक पहुंचा विरोध का सिलसिला

अगस्त के अंतिम सप्ताह में उत्तराखंड के करीब सभी 13 जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थानों का घेराव किया और पुलिस को लिखित शिकायतें सौंपीं। शिकायतों में धार्मिक और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने तथा दलित विरोधी मानसिकता प्रदर्शित करने के आरोप लगाए गए।

हर जिले में क्षेत्राधिकारी स्तर के अधिकारियों को जांच सौंपी गई थी। शिकायतों की एक-एक आधिकारिक प्रति हल्द्वानी पुलिस को भी भेजी गई।

11 अगस्त से 7 सितंबर तक कब क्या हुआ

11 अगस्त: शुद्धीकरण को लेकर कांग्रेस की पहली प्रतिक्रिया सामने आई।

12 अगस्त: नैनीताल जिले में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया।

13 अगस्त: हल्द्वानी में अनुसूचित मोर्चा ने प्रदर्शन किया।

14 अगस्त: संसद में खरगे ने मामला उठाया और हल्द्वानी में कांग्रेसियों ने सत्याग्रह मार्च निकाला।

24 अगस्त: कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात कर मामले को उठाया।

29 अगस्त: राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेसवार्ता कर शुद्धीकरण मामले को उठाया।

31 अगस्त: कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक कांग्रेस ने प्रदर्शन किया।

1 सितंबर: देहरादून और हल्द्वानी में प्रदर्शन हुए।

2 सितंबर: हल्द्वानी में युवा कांग्रेस ने जुलूस निकाला और मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

5 सितंबर: रुद्रपुर में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया।

7 सितंबर: देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया।