Thursday, July 2, 2026
उत्तर प्रदेश

राम मंदिर चढ़ावा मामले में बड़ा खुलासा! नोटों की बंडलिंग के दौरान हुई कथित हेराफेरी, जांच में सामने आया नया एंगल

अयोध्या: राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा मामले की जांच में एक नया और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मामले में नामजद आठ आरोपियों में से छह कर्मियों की जिम्मेदारी नोटों की मशीन से गिनती करना नहीं थी, बल्कि दानपात्रों से निकले मुड़े-तुड़े नोटों को व्यवस्थित कर बंडल तैयार करना था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कथित हेराफेरी इसी प्रक्रिया के दौरान की गई।

नोटों को सीधा कर बनाए जाते थे बंडल

जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और करुणेश पांडेय की ड्यूटी दानपात्रों से निकली नकदी को व्यवस्थित करने की थी। ये कर्मचारी मुड़े-तुड़े नोटों को सीधा कर उनकी बंडलिंग करते थे और रबर लगाकर सुरक्षित रखते थे। सूत्रों का दावा है कि इसी चरण में कथित अनियमितताएं हुईं।

जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि दानपात्रों को खाली करने के दौरान कुछ छोटे आभूषणों के गायब होने की भी आशंका जताई गई है, जिसकी अलग से जांच की जा रही है।

करीब 40 दानपात्रों से निकलता था नकद चढ़ावा

सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर परिसर में स्थापित लगभग 40 दानपात्रों से बड़ी मात्रा में नकद चढ़ावा प्राप्त होता था। अधिकांश नोट मुड़े-तुड़े होने के कारण उन्हें पहले व्यवस्थित किया जाता था। इसके बाद उन्हें एक दिन तक सुरक्षित रखा जाता और फिर बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में मशीनों के जरिए गणना की जाती थी। गिनती पूरी होने के बाद नकदी पर स्लिप लगाकर बक्सों में सील किया जाता और बैंक में जमा कराया जाता था।

एमओयू के बाद बदली थी भुगतान व्यवस्था

जानकारी के अनुसार, 9 फरवरी 2024 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बीच हुए समझौते के बाद संबंधित कर्मियों को ट्रस्ट की अनुशंसा पर सैनिक सिक्योरिटीज के माध्यम से वेतन दिया जाने लगा था। हालांकि, इनमें से कई कर्मचारी इस व्यवस्था के लागू होने से पहले भी इसी कार्य से जुड़े हुए थे।

रामशंकर यादव की भूमिका पर जांच एजेंसियों का फोकस

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टीनू पूरे संचालन तंत्र से जुड़ा हुआ था और उसे विशेष अधिकार प्राप्त थे। बताया जा रहा है कि वह वॉकी-टॉकी के जरिए परिसर में आने-जाने वाले लोगों की निगरानी करता था और कुछ मामलों में बिना तलाशी प्रवेश एवं निकास की अनुमति दिलाने की स्थिति में था। जांच एजेंसियां इस व्यवस्था के संभावित दुरुपयोग की पड़ताल कर रही हैं।

निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे सुभाष श्रीवास्तव

सूत्रों के अनुसार, सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव गणना प्रक्रिया की निगरानी से जुड़े हुए थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने पर्यवेक्षण में आवश्यक सतर्कता नहीं बरती। वहीं टीनू यादव की भूमिका व्यवस्था संचालन से संबंधित बताई जा रही है। दोनों की जिम्मेदारियों और संभावित भूमिका की गहन जांच जारी है।

छह कर्मचारियों की थी यह जिम्मेदारी

जांच में सामने आया है कि छह कर्मचारियों का मुख्य कार्य दानपात्रों से निकले नोटों को सीधा करना, उनकी बंडलिंग करना और उन्हें व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखना था। मशीनों के जरिए नोटों की गणना करना उनकी जिम्मेदारी में शामिल नहीं था।

मशीन से गिनती करते थे बैंक के स्थायी कर्मचारी

सूत्रों के मुताबिक, नोटों की वास्तविक गणना स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के स्थायी कर्मचारियों द्वारा मशीनों से की जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में ट्रस्ट के प्रतिनिधि भी मौजूद रहते थे। बताया गया है कि बैंक के आठ स्थायी कर्मचारी गणना कार्य में शामिल थे। गिनती पूरी होने के बाद नकदी को सीलबंद कर बैंक में जमा कराया जाता था।