14 घंटे का लंबा सफर अब 6-7 घंटे में सिमटेगा, गंगा एक्सप्रेसवे से मेरठ-प्रयागराज कनेक्टिविटी तेज लेकिन बढ़ेगा खर्च का बोझ
मेरठ। मेरठ से प्रयागराज तक यात्रा को तेज और सुगम बनाने वाले गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से जहां सफर का समय आधे से भी कम होने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बढ़ते खर्च को लेकर चिंता भी सामने आ रही है। खासकर इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने वाले वादकारियों और अधिवक्ताओं के लिए यह एक्सप्रेसवे समय तो बचाएगा, लेकिन जेब पर अतिरिक्त भार डाल सकता है।
गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से प्रयागराज की दूरी तय करने में अब 12 से 14 घंटे के बजाय करीब 6 से 7 घंटे लगने का अनुमान जताया जा रहा है। इससे यात्रा अधिक सुविधाजनक और तेज जरूर होगी, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए यह राहत अधूरी साबित हो सकती है।
तेज सफर, लेकिन बढ़ेगा खर्च का दबाव
वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि एक्सप्रेसवे से समय की बचत तो होगी, लेकिन यात्रा सस्ती नहीं होगी। निजी वाहन से सफर करने पर ईंधन खर्च के साथ भारी टोल टैक्स देना पड़ेगा, जो आम और गरीब लोगों के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में न्याय की राह आसान होने के बजाय महंगी पड़ सकती है।
हाई कोर्ट बेंच की मांग फिर हुई तेज
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक्सप्रेसवे बनने से पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय नहीं मिल पाएगा। उनका कहना है कि सरकार को इस क्षेत्र में हाई कोर्ट की बेंच स्थापित करनी होगी, तभी आम लोगों को वास्तविक राहत मिल सकेगी। बिना बेंच के लोगों को प्रयागराज तक जाना मजबूरी बना रहेगा।
शहरों से दूर एक्सप्रेसवे का व्यापार पर असर
गंगा एक्सप्रेसवे शहरों की आबादी से दूर बन रहा है, जिसके चलते यातायात सीधे शहरों में प्रवेश नहीं करेगा। इसका असर स्थानीय व्यापार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले यात्री शहरों में रुकने के बजाय सीधे आगे बढ़ जाएंगे, जिससे छोटे व्यापारियों को नुकसान हो सकता है।
वादकारियों को केवल समय की बचत, अन्य लाभ सीमित
कानूनी जानकारों के मुताबिक इस परियोजना से उद्योग, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को फायदा मिलने की उम्मीद है, लेकिन वादकारियों के लिए इसका लाभ सीमित रहेगा। हाई कोर्ट में पहले से लंबित मामलों की अधिक संख्या के कारण सुनवाई में तेजी की संभावना कम ही है। ऐसे में यात्रा का समय घटने के बावजूद न्याय मिलने में देरी की समस्या बनी रह सकती है।
गरीब वर्ग के लिए न्याय अब भी चुनौती
आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को जमानत और अन्य कानूनी मामलों के लिए प्रयागराज जाना पड़ता है, जिसमें कई दिन और पर्याप्त खर्च लगता है। एक्सप्रेसवे से समय जरूर कम होगा, लेकिन दूरी और खर्च दोनों लगभग समान या अधिक रहेंगे। भारी टोल टैक्स और ईंधन लागत उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन सकती है।
कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे ने मेरठ और प्रयागराज के बीच कनेक्टिविटी को नई गति दी है, लेकिन सस्ती और सुलभ न्याय व्यवस्था के लिए अभी भी बुनियादी सुधारों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
