Friday, April 24, 2026
Latest:
उत्तर प्रदेश

‘लैब टू लैंड’ से बदली यूपी की खेती की तस्वीर: सीएम योगी बोले—तकनीक, नवाचार और बेहतर नीतियों से कृषि अर्थव्यवस्था को मिली नई दिशा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में “लैब टू लैंड” की अवधारणा अब जमीन पर पूरी तरह उतर चुकी है। वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीतियों और केंद्र-राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों ने प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि, प्रति हेक्टेयर उत्पादन में रिकॉर्ड सुधार, बहुफसली खेती का विस्तार और वैल्यू एडिशन की दिशा में बढ़ते कदम इस बदलाव के स्पष्ट संकेत हैं। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों के सशक्तीकरण, अंतरराष्ट्रीय कृषि संस्थानों की स्थापना और प्रगतिशील किसानों की सक्रिय भागीदारी को इस परिवर्तन का आधार बताया।

एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुसार नीति निर्माण पर जोर

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियों के अनुसार नीतियां बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में इस तरह के सम्मेलन आयोजित करने से बेहतर परिणाम सामने आते हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि ‘विकसित कृषि अभियान’ और ‘खेती की बात, खेत में’ कार्यक्रमों के दौरान किसानों और कृषि वैज्ञानिकों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला।

उन्होंने कहा कि पहले प्रयोगशालाओं में होने वाले अनुसंधान को खेत तक पहुंचने में लंबा समय लगता था, लेकिन अब “लैब टू लैंड” के जरिए तकनीक सीधे किसानों तक पहुंच रही है। इस पहल के लिए उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रयासों की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।

किसानों को सही जानकारी मिले तो बेहतर परिणाम संभव

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि की अपार संभावनाएं हैं और यदि किसानों को योजनाओं की सही जानकारी दी जाए, तो वे स्वयं बेहतर परिणाम देने में सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में केवल 69 कृषि विज्ञान केंद्र थे, जो लगभग निष्क्रिय स्थिति में थे, लेकिन अब इन केंद्रों को सशक्त किया गया है और 9 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से कृषि विकास को गति मिल रही है।

कृषि को वैल्यू एडिशन से जोड़ने की जरूरत

उन्होंने कहा कि कृषि और मैन्युफैक्चरिंग के बीच बेहतर समन्वय से विकास की रफ्तार और तेज हो सकती है। वर्तमान में कृषि का योगदान घटकर करीब 20-21 प्रतिशत रह गया है, ऐसे में इसे वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ना जरूरी है। इसके लिए नए प्रयासों को मजबूती देने और प्रभावी तरीके से लागू करने की आवश्यकता है।

तकनीक निभा रही निर्णायक भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक आज कृषि क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि वाराणसी में इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट की स्थापना से नई-नई किस्मों का विकास हो रहा है और विभिन्न जोन के अनुसार उपयुक्त तकनीकों का चयन संभव हुआ है। इसके परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्रों में धान का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 100 कुंतल तक पहुंच गया है, जो पहले 50-60 कुंतल तक सीमित था।

उन्होंने यह भी कहा कि अल नीनो जैसी चुनौतियों के बावजूद उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रगतिशील किसानों की भूमिका से मिल रहा प्रेरणा

मुख्यमंत्री ने बाराबंकी के पद्म सम्मानित किसान रामशरण वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित शैक्षणिक योग्यता के बावजूद उन्होंने वैज्ञानिक खेती से शानदार परिणाम हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के कई जिलों में किसान एक के बजाय तीन-तीन फसलें ले रहे हैं और बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।

उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, किसानों को मिल रहा उचित मूल्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में लगभग 425 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 211 लाख मीट्रिक टन चावल, 245 लाख मीट्रिक टन आलू और 48 लाख मीट्रिक टन तिलहन का उत्पादन हो रहा है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है।

उन्होंने आगरा में इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर की स्थापना का भी जिक्र किया और कहा कि इससे फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।

सम्मेलन में कई राज्यों के मंत्री और अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर केंद्रीय और विभिन्न राज्यों के कृषि व उद्यान से जुड़े मंत्री और अधिकारी भी मौजूद रहे। सम्मेलन के माध्यम से अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुसार कृषि विकास के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।