Friday, April 24, 2026
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उत्तर प्रदेश

यूपी में गन्ना किसानों के लिए नई सर्वे नीति लागू, 1 मई से शुरू होगा GPS आधारित सर्वे; मोबाइल पर सीधे मिलेगी खेत की पूरी जानकारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के हित में अहम कदम उठाते हुए नई गन्ना सर्वेक्षण नीति लागू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जारी इस नीति के तहत राज्य में गन्ने की फसल का आधुनिक तकनीक से जीपीएस आधारित सर्वेक्षण कराया जाएगा। यह सर्वे 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। सर्वेक्षण से पहले पंजीकृत किसानों को तीन दिन पूर्व मोबाइल एसएमएस के जरिए सूचना दी जाएगी, जिससे वे अपनी उपस्थिति सुनिश्चित कर सकें।

सर्वे टीम में होंगे विभागीय अधिकारी और मिल कर्मचारी

नई व्यवस्था के तहत सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल का कर्मचारी शामिल रहेगा। इन दोनों को सर्वे से पहले विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि प्रक्रिया पूरी तरह सटीक और पारदर्शी रहे। सर्वे के दौरान किसान की मौके पर मौजूदगी अनिवार्य होगी। टीम खेत पर पहुंचकर जीपीएस तकनीक के माध्यम से फसल से जुड़ा पूरा डाटा सीधे विभाग के सर्वर पर अपलोड करेगी।

सर्वे के बाद मोबाइल पर मिलेगी पूरी रिपोर्ट

सर्वे प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों को उनके खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म और अन्य जरूरी जानकारियां एसएमएस के जरिए भेजी जाएंगी। इससे किसानों को अपनी फसल का प्रमाणित रिकॉर्ड सीधे मोबाइल पर उपलब्ध हो सकेगा, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ेंगी।

पेराई सत्र 2026-27 के लिए जारी हुई नीति

गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के अनुसार, पेराई सत्र 2026-27 के लिए यह नई सर्वे नीति लागू की गई है। सर्वे का काम तय समयसीमा में पूरा किया जाएगा। साथ ही किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने सर्वेक्षित खेत की जानकारी राजस्व विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर सत्यापित कर सकते हैं। अंतिम आंकड़े चीनी मिलों द्वारा विभागीय वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे और अपनी वेबसाइट पर भी प्रदर्शित किए जाएंगे।

सर्वे के दौरान नए किसानों का भी होगा पंजीकरण

विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण के दौरान नए किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितंबर 2026 तक पंजीकृत किसानों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही उपज बढ़ाने के लिए सर्वे की अवधि से लेकर 30 सितंबर तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन प्रक्रिया के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों से 10 रुपये, लघु किसानों से 100 रुपये और अन्य किसानों से 200 रुपये शुल्क लिया जाएगा।