Tuesday, April 21, 2026
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700 से ज्यादा नागरिकों की चुनाव आयोग से शिकायत, पीएम मोदी के ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ पर आचार संहिता उल्लंघन के आरोप, जांच और कार्रवाई की मांग तेज

देश के पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों सहित 700 से अधिक नागरिकों ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 18 अप्रैल के ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस संबोधन के जरिए आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन किया गया है और सरकारी मंचों का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया गया।

चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र में क्या कहा गया?
20 अप्रैल को मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजे गए पत्र में शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री का संबोधन दूरदर्शन, संसद टीवी और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सरकारी प्रसारण माध्यमों पर प्रसारित किया गया, जो चुनावी माहौल में निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है। पत्र में कहा गया है कि सरकारी संसाधनों के जरिए किसी भी राजनीतिक संदेश का प्रसारण सत्ताधारी दल को अनुचित लाभ देता है और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना को प्रभावित करता है।

आचार संहिता लागू होने के बीच उठे सवाल
वर्तमान में असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, जहां आचार संहिता प्रभावी है। ऐसे में शिकायतकर्ताओं का कहना है कि किसी भी मंत्री या शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा सरकारी मंच का इस्तेमाल चुनावी संदर्भ में करना नियमों के विपरीत है। आचार संहिता के अनुसार सरकारी मशीनरी और संसाधनों का चुनावी लाभ के लिए उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।

चुनाव आयोग से क्या मांग की गई?
पत्र में चुनाव आयोग से कई अहम मांगें की गई हैं। इसमें कहा गया है कि आयोग प्रधानमंत्री के संबोधन की सामग्री और प्रसारण के तरीके दोनों की विस्तृत जांच करे और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे। इसके साथ ही यदि यह प्रसारण अनुमति के तहत हुआ था तो विपक्षी दलों को भी समान अवसर और बराबर प्रसारण समय दिया जाए। वहीं, अगर आचार संहिता उल्लंघन साबित होता है तो इस सामग्री को सभी सरकारी प्लेटफॉर्म से तत्काल हटाने की मांग भी की गई है।

कौन-कौन हैं शिकायतकर्ताओं में शामिल?
इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं, जिनमें दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जयती घोष, संगीतकार और लेखक टी.एम. कृष्णा, तथा पूर्व केंद्रीय सचिव ई.ए.एस. सरमा जैसे व्यक्ति शामिल हैं। इन सभी ने चुनाव आयोग से संविधान के तहत अपनी भूमिका निभाते हुए तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई की अपील की है।

18 अप्रैल के संबोधन में पीएम मोदी ने क्या कहा था?
विवादित संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन (महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव) को पारित न किए जाने का उल्लेख किया और इसे महिलाओं के लिए बड़ा झटका बताया। उन्होंने कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन पार्टियों ने मिलकर इस विधेयक को रोकने का काम किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे महिलाओं के हित प्रभावित हुए हैं और उन्होंने इस मुद्दे पर देश की महिलाओं से माफी मांगने की बात भी कही। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता देने और संसद की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया।