Monday, April 20, 2026
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उत्तर प्रदेश

स्थानीय पोषक खाद्य पदार्थों से थाली सजाएं, एनीमिया को दूर भगाएं

मुकेश शर्मा

आधी आबादी का करीब आधा हिस्सा आज खून की कमी यानि एनीमिया की समस्या से जूझ रहा है। इस समस्या का सही खानपान के माध्यम से आसानी से समाधान किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि बचपन से ही पोषण का खास ख्याल रखा जाए। इसके लिए जरूरी नहीं है कि महंगे खाद्य पदार्थों को बाजार से खरीदकर ही बच्चों को खिलाएं बल्कि स्थानीय स्तर पर प्राप्त पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थों, हरी सब्जियों, सहजन और मौसमी फलों को उनकी थाली में शामिल करके उनको स्वस्थ और खुशहाल जीवन का उपहार प्रदान किया जा सकता है। इन खाद्य पदार्थों में आयरन, विटामिन-सी और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की अहम भूमिका होती है। संतुलित आहार के साथ आयरन की गोली लेने से खून की कमी से बचा जा सकता है।

सरकार का भी पूरा जोर एनीमिया मुक्त भारत बनाने पर है। इसी को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2018 में एनीमिया मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की गयी थी। एनीमिया मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य बच्चों, किशोरों और महिलाओं के विभिन्न आयु वर्गों में एनीमिया को कम करना था। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5, 2019-21) के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो छह समूहों में एनीमिया की दर पुरुषों (15-49 वर्ष) में 25.0 प्रतिशत, महिलाओं (15-49 वर्ष) में 57.0 प्रतिशत, किशोरों (15-19 वर्ष) में 31.1 प्रतिशत, किशोरियों में 59.1 प्रतिशत, गर्भवती (15-49 वर्ष) में 52.2 प्रतिशत और बच्चों (6-59 महीने) में 67.1 प्रतिशत है। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत साल भर चलने वाले व्यापक व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) अभियान का उद्देश्य है कि आयरन फोलिक एसिड अनुपूरण और कृमिनाशक दवाओं के अनुपालन में सुधार किया जाए, शिशु और छोटे बच्चों के लिए उचित पोषण प्रथाओं को बढ़ावा दिया जाए, आहार विविधता, मात्रा, आवृत्ति और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के माध्यम से आयरन युक्त भोजन के सेवन में वृद्धि को प्रोत्साहित किया जाए, जिसमें स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने पर विशेष जोर दिया जाए।

किशोरावस्था एक ऐसे शारीरिक बदलाव का दौर होता है, जब शरीर के सम्पूर्ण विकास के लिए आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन की अधिक मात्रा की जरूरत होती है। यही दौर जीवन की ऊँची उड़ान और मनमुताबिक़ मुकाम हासिल करने का भी होता है। ऐसे में एनीमिया से उन्हें सुरक्षित बनाने के लिए भोजन में हरे पत्तेदार सब्जियों को जरूर शामिल करें ताकि भरपूर मात्रा में शरीर को आयरन की मात्रा मिल सके। इन सब्जियों में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त मात्रा में मिलने वाली भिंडी, मटर, सेम की फलियाँ, चौलाई, पालक, बथुआ, मेथी, सहजन और सरसों के साग को शामिल किया जा सकता है। यह सब्जियां हीमोग्लोबिन बढ़ाने में बहुत ही मददगार साबित होती हैं। इनके अवशोषण को बढ़ाने के लिए इनमें नींबू या टमाटर के साथ पकाकर खाना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। पालक और सहजन में जहाँ आयरन की मात्रा भरपूर होती है वहीँ मेथी में आयरन के साथ फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी उच्च मात्रा में होते हैं।

बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध मोटा अनाज और दाल को भी जरूर प्राथमिकता दें। इनमें मक्का, बाजरा, रागी, ज्वार, राजमा, नट्स, चना दाल, काला चना, सोयाबीन और मसूर आदि को भोजन में शामिल कर बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है। दैनिक आहार में पीले एवं नारंगी फलों को भी शामिल करके शरीर को सुडौल और आकर्षक बनाया जा सकता है। इनमें पपीता, आम, खरबूज, कद्दू, गाजर आदि को शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा तिल, गुड़, चना और अलसी भी शरीर के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

विटामिन –सी युक्त आहार भी एनीमिया की समस्या से निजात दिलाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसके लिए अंकुरित चना/दाल, आंवला, नींबू, संतरा, टमाटर, अंगूर, अमरुद आदि को लिया जा सकता है। यह सभी ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो स्थानीय स्तर पर मौसम के अनुरूप आसानी से कम कीमत पर मिल सकते हैं, बस जरूरत है इनको अपनाने की। यह भी जानना जरूरी है कि शारीरिक बदलावों के मुताबिक़ सही पोषण का मतलब केवल भरपेट भोजन से नहीं है बल्कि यह देखना जरूरी है कि वह कितने पोषक खाद्य पदार्थों से भरपूर है। समुदाय में इस बारे में जागरूकता की भी जरूरत है ताकि उनको ज्ञात हो सके कि शरीर को भरपूर ऊर्जा के लिए जहाँ कार्बोहाइड्रेट की जरूरत होती है वहीँ मांशपेशियों की मजबूती और वृद्धि के लिए शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन की भी जरूरत होती है। इसी प्रकार वसा, विटामिन, खनिज और पानी की भी शरीर को जरूरत होती है। यह जरूरत अमूमन हर आयु वर्ग के लोगों को होती है किन्तु कुछ खास शारीरिक गतिविधियों या बदलावों के समय इनकी मात्रा अलग-अलग हो सकती है।

गर्मी का मौसम दस्तक दे चुका है, ऐसे में गर्मी से बचने के लिए बहुत ही सजग और सुरक्षित रहने की जरूरत है। खुले में काम करने वालों को तो इससे बचने के हर जरूरी इंतजाम का खास ख्याल रखना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि हर दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। घर से कुछ खाकर ही बाहर निकलें, खाली पेट कदापि न निकलें। इस समय अधिक तैलीय खाद्य पदार्थों से बचना ही श्रेयस्कर होगा। गर्मी में चुस्त कपड़े न पहनकर हल्के या ढीले कपड़े पहनकर ही बाहर निकलें। मध्य दोपहर में घर से बाहर तभी निकलें जब बहुत जरूरी हो। यह भी ध्यान रहे कि भीषण गर्मी में चक्कर आये, तेज बुखार हो या उल्टी आये तो स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर चिकित्सक से अवश्य सम्पर्क करें।

(लेखक पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं)