उत्तर प्रदेश के गांव आत्मनिर्भर, गोबरधन योजना से पंचायतों की कमाई में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गांव अब स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत बन रहे हैं। राज्य की गोबरधन योजना के तहत ग्राम पंचायतें गोबर और जैविक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन कर बायोगैस ऊर्जा और जैविक खाद का उत्पादन कर रही हैं। इस पहल से पंचायतों ने अप्रैल 2023 से फरवरी 2026 के बीच 28 लाख रुपये से अधिक की कमाई की है।
बायोगैस ऊर्जा से चल रही मशीनें और स्थानीय विकास
बायोगैस ऊर्जा का इस्तेमाल गांवों में आटा चक्कियां और तेल पेराई मशीनों को चलाने के लिए किया जा रहा है। रामपुर जिले में विशेष रूप से तेल पिराई मशीनें बायोगैस ऊर्जा से संचालित हो रही हैं। पंचायतों में स्थापित बायोगैस संयंत्र गोबर, रसोई कचरे और कृषि अवशेषों से स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद का उत्पादन कर रहे हैं।
किस जिले की पंचायतें कर रही हैं सबसे अधिक कमाई
गोबरधन योजना से कमाई के मामले में ललितपुर जिला सबसे आगे है, जहां ग्राम पंचायतों ने 3,37,990 रुपये कमाए हैं। इसके बाद श्रावस्ती जिले में 2,87,036 रुपये और रामपुर जिले में 1,23,400 रुपये की कमाई दर्ज की गई है।
राज्य में बायोगैस संयंत्रों की स्थिति
पंचायती राज विभाग के अनुसार, राज्य के 74 जिलों में कुल 116 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए गए हैं। आगरा, ललितपुर, श्रावस्ती, बुलंदशहर, बांदा, सोनभद्र और हरदोई जिलों में बायोगैस ऊर्जा से आटा चक्कियां संचालित हो रही हैं। वहीं, जैविक खाद का इस्तेमाल किसान जैविक खेती में कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम और मिट्टी की उर्वरता बढ़ रही है।
सरकारी प्रयास और योजना का विस्तार
पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार गांवों को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि गोबरधन योजना को प्रोत्साहित कर पंचायतों की कमाई बढ़ाई जा रही है, जिससे स्थानीय विकास कार्यों में तेजी आएगी। निदेशक पंचायती राज विभाग अमित कुमार सिंह ने कहा कि इस योजना को अन्य पंचायतों में भी विस्तार देने की योजना है।
