यूपी में गेहूं खरीद का बड़ा प्लान: 50 लाख टन खरीद का लक्ष्य, MSP बढ़ाकर 2585 रुपये; 77 दिनों तक चलेगी प्रक्रिया
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं खरीद को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इस बार राज्य में 30 मार्च से 15 जून तक कुल 77 दिनों तक सरकारी खरीद की जाएगी। किसानों को राहत देते हुए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 160 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
अब किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जाएगा, जबकि पिछले वर्ष यह दर 2425 रुपये प्रति क्विंटल थी। सरकार ने इस बार 50 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है।
6500 क्रय केंद्रों पर होगी खरीद, किसानों के लिए विशेष इंतजाम
कैबिनेट बैठक के बाद कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने जानकारी दी कि खाद्य एवं रसद विभाग की विपणन शाखा समेत आठ एजेंसियों के जरिए 6500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। ये केंद्र सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित होंगे।
किसानों की सुविधा के लिए इन केंद्रों पर छाया, पेयजल और बैठने की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही गेहूं की उतराई, छनाई और सफाई के लिए किसानों को 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त भुगतान भी दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर बढ़ाया गया लक्ष्य
कृषि मंत्री के मुताबिक, पहले 30 लाख टन खरीद का प्रस्ताव था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे बढ़ाकर 50 लाख टन करने के निर्देश दिए। साथ ही किसानों को भुगतान 48 घंटे के भीतर डीबीटी के माध्यम से करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के लिए पूरी खरीद प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। अब तक 1,95,628 किसान पंजीकरण करा चुके हैं और 2829 क्रय केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं।
FPO और FPC को भी खरीद में शामिल करने का फैसला
इस बार सरकार ने कृषि उत्पादक संगठनों (FPO) और कृषि उत्पादक कंपनियों (FPC) को भी खरीद प्रक्रिया में शामिल करने की अनुमति दी है। हालांकि इसके लिए शर्त रखी गई है कि संगठन का पंजीकरण कम से कम एक वर्ष पुराना हो और खाते में 20 लाख रुपये की राशि हो।
धान आपूर्ति में बोरे की कमी दूर करने के लिए मंजूरी
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीद में सामने आई बोरे की कमी को दूर करने के लिए भी सरकार ने कदम उठाया है। कैबिनेट ने 87,000 गांठ जूट बोरे खरीदने के लिए अतिरिक्त धनराशि को मंजूरी दे दी है।
बढ़ी कीमतों के कारण पहले केवल 71,787 बोरे ही उपलब्ध हो सके थे, जबकि शेष खरीद के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की आवश्यकता जताई गई थी। अब इस फैसले से धान और कस्टम मिल्ड राइस की आपूर्ति में आ रही बाधाएं दूर होने की उम्मीद है।
