राजस्थान

बांसवाड़ा में आस्था की अनोखी परंपरा: धधकते अंगारों पर नंगे पांव चले श्रद्धालु, नवजातों को गोद में लेकर कराई होलिका की परिक्रमा

नई दिल्ली। राजस्थान के वागड़ अंचल में Holi का पर्व इस बार भी गहरी आस्था और परंपराओं के अनोखे रंगों के साथ मनाया जा रहा है। Banswara जिले के भचड़िया गांव में Holika Dahan के बाद सदियों पुरानी परंपरा के तहत श्रद्धालुओं ने धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर अपनी आस्था प्रकट की। गांव में देर रात तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और दहकते कोयलों के बीच से गुजरते हुए अपनी मनोकामनाएं मांगीं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। गांव के युवाओं ने भी निर्भीक होकर जलते अंगारों पर चलकर अपनी आस्था व्यक्त की। बुजुर्गों के अनुसार नई पीढ़ी भी इस परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रही है, जिससे यह सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत बनी हुई है।

नवजातों को गोद में लेकर कराई गई होलिका की परिक्रमा

होलिका दहन के दौरान गांव की महिलाएं नवजात और छोटे बच्चों को गोद में लेकर आयोजन स्थल पर पहुंचीं। परंपरा के अनुसार बच्चों की सुख-समृद्धि और बुरी नजर से रक्षा की कामना के साथ उनकी होलिका की परिक्रमा करवाई गई। ग्रामीणों की मान्यता है कि इससे बच्चों को मौसमी बीमारियों से भी बचाव मिलता है और उनका जीवन स्वस्थ और सुरक्षित रहता है।

निर्जला व्रत के बाद निभाई जाती है रस्म

अंगारों पर चलने वाले श्रद्धालु इस परंपरा को निभाने से पहले सूर्योदय से अन्न और जल का त्याग कर निर्जला व्रत रखते हैं। दिनभर उपवास करने के बाद शाम को पूर्ण शुद्धता और धार्मिक विधि-विधान के साथ यह अनुष्ठान किया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु धधकते अंगारों पर चलकर अपनी श्रद्धा और विश्वास प्रकट करते हैं।

होलिका दहन के बाद अब गांवों में फाग गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। गुरुवार को Dhulandi का पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा। प्रशासन की ओर से भी आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।