Sunday, March 1, 2026
उत्तर प्रदेशलखनऊ

सीएम सामूहिक विवाह योजना में 1.01 लाख की घोषणा पर संशय, मंत्री असीम अरुण ने साफ किया भ्रम

लखनऊ में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते दौरान मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की अनुदान राशि को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई। बजट भाषण में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने योजना के तहत बेटियों को 1.01 लाख रुपये अनुदान दिए जाने की बात कही, लेकिन बाद में सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि अनुदान राशि में किसी तरह की नई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

बजट भाषण में 1.01 लाख का जिक्र

बुधवार को विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने अपने भाषण के पेज नंबर 28 पर समाज कल्याण विभाग से संबंधित योजनाओं का उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सभी वर्गों की पुत्रियों के विवाह के लिए अनुदान राशि 51 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.01 लाख रुपये कर दी गई है। उनके इस बयान के बाद योजना की वास्तविक अनुदान राशि को लेकर सवाल उठने लगे।

असीम अरुण ने दी आधिकारिक जानकारी

समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत वर्तमान में एक लाख रुपये ही अनुदान दिया जा रहा है और इसमें किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि एक हजार रुपये की अतिरिक्त वृद्धि संबंधी कोई निर्णय नहीं हुआ है।

2017 से संचालित है योजना

प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2017 से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का संचालन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग प्रदान करना है। शुरुआत में योजना के तहत प्रति कन्या 51 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता था।

पिछले बजट में सरकार ने इस राशि को बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया था, जो वर्तमान में प्रभावी है।

अनुदान राशि का वितरण कैसे होता है

योजना के तहत दी जाने वाली एक लाख रुपये की सहायता राशि को तीन हिस्सों में बांटा गया है। इसमें 60 हजार रुपये सीधे कन्या के बैंक खाते में भेजे जाते हैं। 25 हजार रुपये मूल्य का घरेलू सामान नवविवाहित जोड़े को उपहार स्वरूप दिया जाता है। जबकि 15 हजार रुपये सामूहिक विवाह समारोह के आयोजन पर खर्च किए जाते हैं।

सरकार ने योजना की पात्रता से जुड़ी आय सीमा को भी पहले के दो लाख रुपये वार्षिक से बढ़ाकर तीन लाख रुपये वार्षिक कर दिया है। इस संबंध में 23 मई को शासनादेश जारी किया गया था।

बजट भाषण के दौरान हुई इस घोषणा के बाद बनी भ्रम की स्थिति पर अब सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट कर दी गई है कि फिलहाल अनुदान राशि एक लाख रुपये ही है और 1.01 लाख रुपये किए जाने का कोई निर्णय लागू नहीं हुआ है।