हिमाचल प्रदेश

हिमाचल के 15 शहरी निकायों में चुनाव पर संकट, सीमाओं के पुनर्गठन और वोटर लिस्ट में देरी से प्रक्रिया अटकी

शिमला। हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच बड़ा प्रशासनिक पेंच सामने आया है। सीमाओं के पुनर्गठन और मतदाता सूचियों को अंतिम रूप न दिए जाने के कारण प्रदेश के 15 शहरी निकायों में चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होती नजर आ रही है। इससे तय समयसीमा में चुनाव कराना राज्य प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।

सिरमौर जिले के संगड़ाह और बिलासपुर जिले के स्वारघाट व झंडूता में नगर निकायों की सीमाओं का पुनर्गठन अब तक पूरा नहीं हो सका है। इन क्षेत्रों का दायरा पहले ही बढ़ाया जा चुका है, लेकिन नई सीमाओं को लेकर अंतिम निर्णय लंबित है, जिसका सीधा असर चुनावी तैयारियों पर पड़ रहा है।

सीमाओं के विस्तार को लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

सीमाओं के पुनर्गठन को लेकर प्रभावित लोगों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि आपत्तियों पर दोबारा विचार किया जाए। हालांकि, अब तक सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, जिससे चुनाव से जुड़ी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

कई नगर निकायों में मतदाता सूची अब भी अधूरी

इधर, नगर परिषद ज्वालामुखी और नगर पंचायत नादौन, धर्मपुर, संधोल व नगरोटा सूरियां में मतदाता सूचियों का काम भी अभी लंबित है। वोटर लिस्ट फाइनल न होने से आरक्षण रोस्टर जारी करने और वार्ड निर्धारण की प्रक्रिया भी अटक गई है, जिससे चुनाव कार्यक्रम तय करना मुश्किल हो रहा है।

28 फरवरी तक पूरी करनी है आरक्षण और पुनर्गठन प्रक्रिया

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी करने और सीमाओं के पुनर्गठन की प्रक्रिया 28 फरवरी तक पूरी की जाए। साथ ही, चुनाव 30 अप्रैल से पहले कराए जाने के आदेश भी दिए गए हैं। ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रशासन को तय समयसीमा में सभी लंबित कार्य पूरे करने के निर्देश दिए हैं।

जहां सीमा परिवर्तन नहीं, वहां वोटर लिस्ट की छपाई शुरू

जिन पंचायतों और शहरी निकायों में सीमाओं में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है, वहां जिला उपायुक्तों द्वारा मतदाता सूचियों को अधिसूचित किया जा चुका है। इसके बाद अब उनकी छपाई का काम शुरू कर दिया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने वार्डवार मतदाता सूचियों की 20-20 प्रतियां छापने के निर्देश दिए हैं, ताकि चुनावी प्रक्रिया समय पर आगे बढ़ाई जा सके।