केंद्रीय बजट पर हेमंत सोरेन का तीखा वार, बोले—आम जनता को क्या मिला? झारखंड कैबिनेट के बाद केंद्र सरकार पर साधा निशाना
रांची। झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद केंद्र सरकार और केंद्रीय बजट को लेकर सियासी पारा चढ़ गया। कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट को आम जनता के लिए निराशाजनक बताते हुए केंद्र सरकार पर सीधे सवाल खड़े किए।
कैबिनेट बैठक में 27 प्रस्तावों को मिली मंजूरी
गुरुवार को आयोजित झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 27 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। यह बैठक 5 फरवरी को संपन्न हुई, जिसमें राज्य से जुड़े अहम फैसलों पर मुहर लगी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंत्रियों के साथ मीडिया के सामने आए और राष्ट्रीय मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखी।
बजट से जनता को राहत नहीं मिलने का दावा
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि बजट को गंभीरता से देखने की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस बजट से आम लोगों को क्या फायदा हुआ है। हेमंत सोरेन के मुताबिक, चाहे कृषि क्षेत्र हो या अन्य कोई सेक्टर, बजट में ऐसा कोई प्रावधान नजर नहीं आता जिससे आम जनता को सीधी राहत मिलती हो।
आम लोगों की जरूरतों को किया गया नजरअंदाज
सीएम ने आरोप लगाया कि केंद्रीय बजट में आम लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि विकास तभी माना जाता है जब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान बने, लेकिन मौजूदा बजट में इसकी झलक नहीं दिखती। कोयला, खनिज और लोहा महंगे होने से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ खनिज संसाधनों की कीमतों पर चर्चा करना काफी नहीं है, यह भी देखा जाना चाहिए कि आम उपयोग की चीजें सस्ती हुई हैं या नहीं।
दाल-चावल महंगे, तो कैसा विकास?
हेमंत सोरेन ने कहा कि बजट के बाद दाल और चावल जैसी जरूरी वस्तुएं भी महंगी हो गई हैं। ऐसे में इसे विकासोन्मुख बजट कैसे कहा जा सकता है। उनके मुताबिक, आम आदमी की थाली पर असर डालने वाले मुद्दों पर बजट पूरी तरह विफल साबित हुआ है।
असम के चाय बागान मजदूरों की हालत पर भी चिंता
असम दौरे से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने वहां के चाय बागान मजदूरों की स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि असम में आज भी चाय बागान मजदूरों की हालत बेहद खराब है और वहां गुलामी जैसी परिस्थितियां देखने को मिलती हैं। सीएम ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है मानो देश के भीतर ही एक अलग देश हो, जहां आज भी अंग्रेजी शासन की छाया दिखाई देती है।
बजट को लेकर तेज होगी सियासी बहस के संकेत
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इन बयानों के बाद केंद्रीय बजट को लेकर राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष के तीखे सवालों के बीच केंद्र सरकार के लिए जवाब देना आसान नहीं माना जा रहा।
