झामुमो स्थापना दिवस पर सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, बोले- बाहर से आकर बसे लोग भी हैं झारखंडी
धनबाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 54वें स्थापना दिवस समारोह के मंच से मुख्यमंत्री और पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने बड़ा और स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड के मूलवासी-आदिवासी ही नहीं, बल्कि बाहर से आकर यहां बस चुके लोग भी झारखंडी हैं और उन्हें इस पहचान पर गर्व होना चाहिए।
झामुमो की पहचान शुरू से ही मूलवासी और आदिवासी राजनीति से जुड़ी रही है। पार्टी के शुरुआती दौर में बाहर से आकर बसे लोगों को ‘दिकू’ कहे जाने की परंपरा रही, लेकिन सत्ता में सात साल पूरे कर चुकी झामुमो अब समावेशी राजनीति की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंच से यह साफ कर दिया कि राज्य में रहने और यहां की संस्कृति को अपनाने वाले सभी लोग झारखंडी हैं।
स्थापना दिवस पर दिया समावेश का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन्म देने वाली मां से ज्यादा बड़ा दर्जा पालन-पोषण करने वाली मां का होता है। इसी तरह जो लोग झारखंड आकर यहीं बस गए, उन्होंने इस राज्य को अपनाया और यहां की मिट्टी से रिश्ता जोड़ा। ऐसे सभी लोग झारखंडी कहलाने के हकदार हैं। यह बयान झामुमो की बदली हुई राजनीतिक सोच और रणनीति को दर्शाता है।
लंदन तक पहुंचा ‘जोहार’ का सम्मान
हेमंत सोरेन ने कहा कि ‘जोहार’ अब सिर्फ झारखंड या देश तक सीमित नहीं रहा। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में, यहां तक कि लंदन में भी लोग जोहार बोल रहे हैं। यह झारखंड की संस्कृति और सम्मान का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के साथ हर मौसम, हर चुनौती और हर परिस्थिति में खड़ी है।
आंदोलनकारियों और गुरुजी को किया याद
मुख्यमंत्री ने झारखंड आंदोलन की लंबी लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि कई ऐसे नेता थे जिन्होंने रास्ता दिखाया, लेकिन आज वे हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने झामुमो के संस्थापक और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि वे सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया में आदिवासी, दलित और मजदूरों की आवाज रहे हैं।
सपनों को पूरा करने का संकल्प दिवस
सोरेन ने कहा कि यह दिन सिर्फ स्थापना दिवस नहीं है, बल्कि गुरुजी के सपनों को पूरा करने का संकल्प लेने का दिन भी है। गौरतलब है कि शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को संवारने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब हम सबकी है।
झारखंड के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाई
गोल्फ ग्राउंड के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यही वह धरती है जिसने भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, बिनोद बिहारी महतो और ए.के. राय जैसे महान नेतृत्व दिए। इन महापुरुषों के बलिदान और संघर्ष ने झारखंड को अलग पहचान दी।
राज्य गठन से सत्ता तक का सफर
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में कई लोग इस मिट्टी में समा गए। राज्य बनने के बाद तंज कसा गया कि ये लोग राज्य नहीं चला पाएंगे, लेकिन झामुमो ने राज्य गठन के 15-16 साल बाद भाजपा से सत्ता छीनकर यह साबित कर दिया कि झारखंड खुद अपना भविष्य तय कर सकता है।
बीमारू राज्य से आगे बढ़ने की कोशिश
सोरेन ने आरोप लगाया कि झारखंड को लंबे समय तक बीमारू बनाकर रखा गया। स्कूल बंद किए गए, गरीबों को मजबूत नहीं होने दिया गया और संसाधनों का शोषण किया गया। उन्होंने कहा कि ‘अबुआ सरकार’ बनने के बाद स्कूल दोबारा खोले गए और निजी संस्थानों की तर्ज पर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
गांव से संचालित हो रही सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार रांची से नहीं, बल्कि गांवों से चल रही है। अधिकारी गांव-गांव जाकर काम कर रहे हैं। गरीब परिवारों को चिन्हित कर 2500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने माताओं-बहनों से बच्चों को पढ़ाने और आईएएस-आईपीएस जैसे पदों के लिए प्रेरित करने की अपील की।
स्थानीय युवाओं के रोजगार पर जोर
धनबाद के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग के जरिए बाहरी लोगों को लाया जा रहा है, इसलिए स्थानीय युवाओं को अपने अधिकारों के लिए सजग रहना होगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को नौकरी देने का कानून बनाया है।
गांव भी हमारा, शहर भी हमारा का नारा
हेमंत सोरेन ने कहा कि गुरुजी के नहीं रहने की कमी जरूर खलती है, लेकिन उनकी सीख से मंजिल जरूर मिलेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि झारखंड विरोधी ताकतों को दोबारा मौका न दिया जाए। गांव और शहर, दोनों जगह संगठन को मजबूत करना जरूरी है, ताकि निकाय और पंचायत चुनावों में पार्टी की पकड़ बनी रहे।
युवाओं को नौकरी और शिक्षा का भरोसा
मुख्यमंत्री ने बताया कि 26 हजार युवाओं को नौकरी दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि युवा सिर्फ सरकारी नौकरी पर निर्भर न रहें, बल्कि ऐसी शिक्षा लें जिससे किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफल हो सकें। रांची में शुरू की गई कोचिंग सुविधा को सभी जिलों तक ले जाने की योजना है।
अग्निवीर के परिजनों को नौकरी का ऐलान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले देश के सुरक्षाबलों में सबसे ज्यादा भर्ती झारखंड से होती थी, लेकिन अब अग्निवीर योजना लागू है। उन्होंने घोषणा की कि अग्निवीर योजना के तहत शामिल किसी जवान की मृत्यु होने पर झारखंड सरकार उसके आश्रित को नौकरी देगी। अंत में उन्होंने बढ़ती महंगाई पर चिंता जताते हुए कहा कि आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
