मुंगेर में डकरा नाला सिंचाई परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, 145 करोड़ की लागत से किसानों के खेतों तक पहुंचेगा पानी
हेमजापुर (मुंगेर)। मुंगेर जिले की बहुप्रतीक्षित डकरा नाला सिंचाई परियोजना एक बार फिर गति पकड़ती नजर आ रही है। खेतों से बाढ़ का पानी निकलते ही नहर निर्माण कार्य तेज हो गया है। कई हिस्सों में नहर का समतलीकरण पूरा कर लिया गया है, जबकि अन्य स्थानों पर खुदाई और संरचना निर्माण का काम तेजी से जारी है। कार्य की प्रगति को देखकर किसानों में उम्मीद जगी है कि आने वाले वर्ष तक नहर का पानी उनके खेतों तक पहुंचना शुरू हो जाएगा।
पहले चरण में उप-मुख्य नहर का निर्माण जारी
परियोजना के पहले चरण के तहत हेरू दियारा पंप हाउस से जमालपुर क्षेत्र होते हुए धरहरा प्रखंड के बाहाचौकी टाल तक उप-मुख्य नहर का निर्माण किया जा रहा है। इस नहर के माध्यम से आसपास के बड़े कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना से जुड़े अभियंताओं का कहना है कि मौसम अनुकूल रहा तो कार्य को तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
वर्षा पर निर्भर खेती से मिलेगी राहत
डकरा नाला सिंचाई परियोजना के पूर्ण होने के बाद जमालपुर, धरहरा और लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड की हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। अभी तक इन इलाकों के किसान मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर खेती करते हैं। बारिश कम होने या अनियमित होने की स्थिति में फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। नहर प्रणाली के विस्तार से सिंचाई के साथ-साथ जल संरक्षण और कृषि उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
खेती की लागत घटेगी, पैदावार बढ़ेगी
किसानों का कहना है कि परियोजना शुरू होने से खेती की लागत कम होगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। धरहरा के बाहाचौकी टाल तक जमीन समतलीकरण का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि मिर्जाचक लगमा गांव तक नहर की खुदाई भी समाप्त हो गई है। हालांकि फिलहाल परियोजना का प्रथम चरण ही चल रहा है, लेकिन इसका सकारात्मक असर अभी से दिखाई देने लगा है।
1982 में बनी थी योजना, 2024 में मिली नई जिंदगी
डकरा नाला सिंचाई परियोजना की परिकल्पना पहली बार वर्ष 1982 में लघु एवं जल संसाधन विभाग के माध्यम से की गई थी। उस समय गंगा नदी से पानी लाकर नहरों के जरिए खेतों तक पहुंचाने की योजना बनी थी, लेकिन गंगा के जलस्तर और प्रवाह में बदलाव के कारण परियोजना ठप पड़ गई। समय के साथ नहरें ध्वस्त होती चली गईं और कई स्थानों पर अतिक्रमण भी हो गया।
लंबे समय से चली आ रही किसानों की मांग के बाद स्थानीय सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की पहल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2024 में इस परियोजना को पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए। इसके बाद से परियोजना को नई रफ्तार मिली और अब काम धरातल पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
फसलों और सब्जियों के उत्पादन को मिलेगी संजीवनी
इस सिंचाई परियोजना से गेहूं, चना, मसूर, अरहर, सरसों, मकई और तिशी जैसी प्रमुख फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। साथ ही आलू, मटर, प्याज, करेला, गोभी और बैंगन जैसी हरी सब्जियों की खेती को भी इससे बड़ा सहारा मिलेगा। समय पर सिंचाई नहीं मिलने से जिन फसलों को पहले नुकसान झेलना पड़ता था, वह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
किसानों का मानना है कि डकरा नाला सिंचाई परियोजना उनके कृषि भविष्य के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है और इसके शीघ्र पूर्ण होने से पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकती है।
